बिल्डर माफिया, रॉयल्टी चोरी और मजदूरों की जान से खिलवाड़ — प्रशासन मौन क्यों?

*पालघर नागरिक विशेष रिपोर्ट.*

पालघर: प्रतीक मयेकर

☑️पालघर शहर और आसपास के क्षेत्रों में बीते कुछ वर्षों से तेज़ी से ऊँची-ऊँची इमारतें खड़ी हो रही हैं, लेकिन इन निर्माण कार्यों के पीछे बड़े पैमाने पर रॉयल्टी चोरी, अवैध निर्माण और कालाधन सफेद करने का खेल चल रहा है — ऐसा स्थानीय हालात देखकर साफ़ दिखाई देता है।

☑️बिल्डिंग निर्माण में लगने वाली रेती, सिमेंट, ईंट, खडी, पत्थर और फाउंडेशन के लिए जमीन से निकाली जाने वाली मिट्टी पर महसूल विभाग की रॉयल्टी लेना कानूनन अनिवार्य है। बावजूद इसके, आरोप हैं कि कई बिल्डर रॉयल्टी का भुगतान किए बिना निर्माण कर रहे हैं और महसूल विभाग के कुछ अधिकारी इस ओर आँख मूँदे हुए हैं, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है।

☑️ एक ओर रेती पर पाबंदी है, वहीं दूसरी ओर पालघर में रेडी मिक्स (RMC) का खुलेआम कारोबार चल रहा है। सवाल यह उठता है कि जब रेती की रॉयल्टी तय नहीं है, तो रेडी मिक्स किस आधार पर तैयार हो रहा है? क्या इसके ज़रिये बड़े माफिया सरकारी रॉयल्टी की चोरी नहीं कर रहे?w

☑️ इन अवैध और अनियमित निर्माण कार्यों में सबसे ज्यादा नुकसान गरीब मजदूरों को उठाना पड़ रहा है। मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिलती, सेफ्टी के कोई इंतज़ाम नहीं होते और ठेकेदार व लेबर कॉन्ट्रैक्टर दलाल बनकर बिल्डर और मजदूर के बीच खड़े रहते हैं। हाल ही में पालघर नवली क्षेत्र में एक मजदूर का निर्माण स्थल से गिरकर गंभीर रूप से घायल होना इसी लापरवाही का उदाहरण है।

☑️पालघर में कभी 2–3 मंज़िल से अधिक इमारतों की अनुमति नहीं थी, लेकिन आज 10 से 15 मंज़िल तक की इमारतें खड़ी दिखाई देती हैं। सवाल यह है कि इतनी ऊँचाई की अनुमति किस आधार पर दी गई? आर्किटेक्ट और क्वालिटी कंट्रोल की रिपोर्ट क्या सही मायने में जाँची जाती है या फिर कागज़ों में ही सब कुछ “मैनेज” कर दिया जाता है?

☑️ कानून के अनुसार 7 मंज़िल से अधिक ऊँची इमारतों के लिए फायर ब्रिगेड की अनुमति अनिवार्य है। पालघर नगरपरिषद ने अब तक कितनी इमारतों को यह अनुमति दी है? इसके साथ ही शहर में कई इमारतें रोड मार्जिन पर बनी और बन रही हैं, फिर भी PWD विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हो रही यह भी बड़ा सवाल है।

☑️ यह मामला सिर्फ एक मजदूर के हादसे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बिल्डर माफिया, प्रशासनिक चुप्पी और सिस्टम की विफलता की कहानी है। जब तक रॉयल्टी चोरी, अवैध निर्माण और मजदूरों की सुरक्षा पर सख़्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसे रुकेंगे नहीं। अब ज़रूरत है कि संबंधित विभाग जागें और जिम्मेदारी तय करें।.. (क्रमश )

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