मोहब्बत, इंसानियत और भाईचारे का पैग़ाम.

मोहब्बत, इंसानियत और भाईचारे का पैग़ाम.

दिनांक : 20 /02/2026

मैं साफ दिल से कहना चाहता हूँ कि मैं पालघर के किसी भी हिंदू, सिख, इसाई या किसी भी धर्म के भाई-बहन के खिलाफ नहीं हूँ।
हम सब इसी मिट्टी के हैं, इसी शहर में जीते हैं और इसी समाज में अपने बच्चों का भविष्य बनाते हैं।
मेरा मज़हब और मेरी तहज़ीब मुझे नफ़रत नहीं, बल्कि मोहब्बत, इंसानियत और भाईचारा सिखाती है।
हमारे बुज़ुर्गों ने हमें साथ रहना, एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करना और हर परिस्थिति में एकजुट रहना सिखाया है।

हम सब मिलकर त्योहार मनाते आए हैं।
दिवाली में हमारे हिंदू भाई मिठाई और फरसाण भेजते हैं, शुभेच्छा देते हैं, हम एक-दूसरे के घर जाते हैं।
ईद पर हम सब मिलकर सेवइयाँ और मिठाई बाँटते हैं।
नवरात्रि के नौ दिन गरबा में साथ खड़े रहते हैं।
गणेशोत्सव, मोहर्रम, क्रिसमस हर त्योहार हमने मिलकर मनाया है।

पालघर की यही असली तहज़ीब है एकता।
यहाँ आज तक कभी जातिवाद या नफ़रत की आग नहीं जली।

अगर कहीं दरार डालने की कोशिश हुई है, तो हमें मिलकर उसे रोकना होगा।
यह पहली बार है कि ऐसी कोशिश दिखाई दे रही है और यह नहीं होना चाहिए।
अगर कोई जातिवाद करेगा, समाजों के बीच दरार डालने की कोशिश करेगा या हमारी धार्मिक भावना से खिलवाड़ करेगा,तो उसके खिलाफ आवाज़ उठाना जरूरी है।

मेरा विरोध किसी धर्म के खिलाफ नहीं है मेरा विरोध सिर्फ उस सोच के खिलाफ है जो नफ़रत फैलाती है।

अगर मेरी किसी बात से किसी भाई या बहन का दिल दुखा हो,तो मैं दिल से माफ़ी चाहता हूँ।

मेरा उद्देश्य सिर्फ पालघर में अमन, इज़्ज़त और भाईचारा बनाए रखना है।
मैं गाँव के सभी जिम्मेदार लोगों से निवेदन करता हूँ कि इस पर गंभीरता से विचार करें।
हम सबको साथ रहना है — मोहब्बत के साथ रहना है।
मैं सभी धर्मों का दिल से आदर करता हूँ।

जय हिंद 🇮🇳
जय महाराष्ट्र 🚩
सलाम 🤝
🙏 जावेद लुलानिया. पालघर

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