पालघर शहर में भंगार माफिया बेलगाम — चोरी, अतिक्रमण और अवैध धंधों से नागरिक परेशान..

पालघर शहर में भंगार माफिया बेलगाम — चोरी, अतिक्रमण और अवैध धंधों से नागरिक परेशान..

 रिपोर्टर :अर्पिता तिवारी 

 

पालघर शहर में इन दिनों भंगार (स्क्रैप) माफिया की गतिविधियाँ खुलेआम बढ़ती नज़र आ रही हैं। घरों के बाहर रखी वस्तुएँ, निर्माण स्थलों पर पड़ी सलाखें (सरिया), इमारतों के नीचे लगी मोटरें, दुकानों के ताले—सब कुछ चोरी होना अब आम बात बन गई है। नागरिकों का कहना है कि चोरों को माल बेचने की सबसे आसान जगह भंगार की दुकानें बन गई हैं, जहाँ बिना जांच-पड़ताल के चोरी का माल खरीदा जाता है

शहर और आसपास के इलाकों में सड़क किनारे अवैध रूप से बनाए गए गोदाम, खुलेआम अतिक्रमण और नियमों को ताक पर रखकर चल रही भंगार दुकानें प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। खासकर एल्यूमिनियम, कॉपर (तांबा), लोखंड (आयरन) जैसी कीमती धातुओं की अलग-अलग दुकानें शहर में चल रही हैं, जिन पर न तो लाइसेंस की जानकारी स्पष्ट है और न ही खरीदे गए माल के बिलों का कोई ठोस रिकॉर्ड सामने आता है।

पालघर के आसपास कई औद्योगिक कंपनियाँ और फैक्ट्रियाँ हैं। आरोप है कि इन उद्योगों से निकलने वाला स्क्रैप भी कई भंगार व्यापारी बिना वैध कागजात के उठाते हैं। इससे न केवल चोरी को बढ़ावा मिलता है, बल्कि टैक्स चोरी और अवैध कारोबार का नेटवर्क भी मजबूत होता जा रहा है। नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि आखिर शहर में कितने भंगार व्यापारी हैं, उनके पास कौन-कौन से लाइसेंस हैं, और वे किस प्रकार का माल खरीदने के लिए अधिकृत हैं—इसकी पारदर्शी जानकारी अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?

शहरवासियों का कहना है कि भंगार माफिया पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो चोरी की घटनाएँ और बढ़ेंगी। नागरिकों ने Palghar Municipal Council, पुलिस प्रशासन और तहसील कार्यालय से मांग की है कि शहर में चल रही सभी भंगार दुकानों और गोदामों का सर्वे किया जाए, लाइसेंस व बिलिंग की जांच हो, अवैध अतिक्रमण हटाया जाए और चोरी का माल खरीदने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

यह मामला केवल चोरी तक सीमित नहीं, बल्कि शहर की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और राजस्व से भी जुड़ा है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक आंखें मूंदे रहता है, या फिर पालघर शहर को भंगार माफिया के चंगुल से मुक्त करने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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