पालघर | अर्पिता तिवारी
पालघर रेलवे स्टेशन परिसर और स्टेशन से सटे क्षेत्रों में इन दिनों अवैध गतिविधियां खुलेआम चलती नजर आ रही हैं। स्टेशन परिसर में बिना किसी अधिकृत अनुमति के पानी, वडापाव, गुटखा, चना-सिंग, बिस्किट, चिप्स के पैकेट, हरे नारियल जैसी खाने-पीने की चीज़ों की अवैध बिक्री जोरों पर है। प्लेटफॉर्म, स्टेशन सर्कुलेटिंग एरिया और बाहर के हिस्सों में फेरीवालों की भरमार से स्टेशन की व्यवस्था पूरी तरह चरमराती दिखाई दे रही है।
इस पूरे मामले में रेलवे प्रशासन, GRP (रेलवे पुलिस) और RPF (रेलवे सुरक्षा बल) की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि इन अवैध धंधों के कारण न केवल स्टेशन की स्वच्छता प्रभावित हो रही है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। इसके साथ ही अवैध रेलवे पार्किंग और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं।
सीनियर सिटीजन सबसे ज्यादा परेशान
सबसे गंभीर स्थिति सीनियर सिटीजन और रोज़ाना अप-डाउन करने वाले यात्रियों की है। पालघर रेलवे स्टेशन पर आज भी इलेक्ट्रिक सीढ़ी (Escalator) और लिफ्ट जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे बुज़ुर्ग यात्रियों को भारी सामान के साथ सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में भारी परेशानी होती है। कई बार यह परेशानी उनकी सेहत और सुरक्षा के लिए भी जोखिम बन जाती है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि स्टेशन परिसर को नो-हॉकिंग ज़ोन घोषित कर सख्ती से अमल किया जाए और सीनियर सिटीजन के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो यात्रियों को बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं, अवैध धंधों को लेकर हफ्ता वसूली और संरक्षण जैसी चर्चाएं भी आम हो रही हैं, जिससे प्रशासन की निष्क्रियता पर और सवाल खड़े हो रहे हैं।
जनहित में आवाज उठाने की मांग
इस मुद्दे पर सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि रेलवे प्रशासन, GRP और RPF संयुक्त रूप से सख्त कार्रवाई करें और पालघर रेलवे स्टेशन को अव्यवस्था और अवैध धंधों से मुक्त करें। यात्रियों का साफ कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन नहीं जागा, तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।
✍️ जावेद लुलानिया
नव भारतीय शिव वाहतूक संघटना, पालघर जिल्हाध्यक्ष
📞 मोबाईल: 8806247860
जनता के हित में मैं हमेशा आवाज उठाता रहूंगा।



