बोईसर रिपोर्टर यूसुफ सैयद।
बोईसर पूर्व के रेलवे फाटक क्रमांक 52 की समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।

बोईसर पूर्व के रेलवे फाटक क्रमांक 52 की समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है। इस फाटक की वजह से आए दिन यहां लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिलता है। कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि लोगों को चार-चार, पांच-पांच घंटे तक ट्रैफिक में फंसे रहना पड़ता है।सुबह हो या शाम, नौकरी पर जाने वाले हों, स्कूल-कॉलेज के बच्चे हों या फिर किसी मरीज को अस्पताल ले जाने वाला परिवार—हर किसी को इस समस्या का सामना करना पड़ता है।सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा होता है जब कोई एम्बुलेंस या गंभीर मरीज इस जाम में फंस जाता है। अगर समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाए तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
फाटक की समस्या के साथ-साथ यहां की खराब सड़क और गड्ढे भी लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। बारिश के दिनों में गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे वाहन चालकों और पैदल आने-जाने वाले लोगों को और ज्यादा मुश्किल होती है।लोगों का कहना है कि वर्षों से रेलवे और PWD की ओर से स्थायी समाधान के आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर अब तक ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही।
आखिर कब बनेगा इस फाटक का स्थायी समाधान?
कब मिलेगा लोगों को जाम और परेशानी से छुटकारा?
और क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
बोईसर पूर्व की जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान और ठोस कार्रवाई चाहती है।



