दहानू पर्यावरण प्राधिकरण के सामने अडानी पावर स्टेशन के खिलाफ आपत्ति

दहानू पर्यावरण प्राधिकरण के सामने अडानी पावर स्टेशन के खिलाफ आपत्ति

​ दहानू के एक चिंतित नागरिक ब्रायन लोबो ने अडानी दहानू थर्मल पावर स्टेशन (ADTPS)को बिना फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (FGD) प्लांट के चलाने की अनुमति देने के खिलाफ दहानू तालुका पर्यावरण संरक्षण प्राधिकरण (DTEPA)में एक आपत्ति दर्ज कराई है। लोबो ने अपने पत्र में 1986 से दहानू में प्लांट के कारण हुए प्रदूषण के दुष्प्रभावों का हवाला दिया है और प्राधिकरण से पर्यावरण और स्थानीय कृषि की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
​नियमों के उल्लंघन का आरोप
​लोबो ने आरोप लगाया कि ADTPS ने जल्दबाजी में आवेदन दाखिल करके पर्यावरण (संरक्षण) (चौथा संशोधन) नियम 2025 की धारा 2(a) का उल्लंघन किया है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, किसी भी थर्मल पावर प्लांट के संचालन के लिए एक विशेष समिति की रिपोर्ट और सिफारिश अनिवार्य है, लेकिन ADTPS ने इस समिति की अनुमति के बिना ही आवेदन कर दिया है। लोबो का कहना है कि यह एक गंभीर चूक है और नियमों की अनदेखी का संकेत है।
सुप्रीम कोर्ट और DTEPA के पुराने आदेशों का हवाला
​अपनी आपत्ति में, लोबो ने सुप्रीम कोर्ट और DTEPA के पुराने फैसलों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने 31 अक्टूबर 1996 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश (WP 231/1994) का जिक्र किया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि FGD प्लांट स्थापित करना अनिवार्य है। इसके अलावा, उन्होंने 12 मई 1999 के DTEPA के उस आदेश का भी हवाला दिया जिसमें प्राधिकरण को NEERI (राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान) की सभी सिफारिशों को लागू करने के लिए कहा गया था। लोबो ने तर्क दिया कि इन आदेशों की अनदेखी करके बिना FGD प्लांट के संचालन की अनुमति देना पूरी तरह से गलत होगा।
​दहानू की संवेदनशीलता और पर्यावरणीय प्रभाव
​लोबो ने अपने पत्र में दहानू के “पर्यावरणीय दृष्टि से अति संवेदनशील क्षेत्र” (Ecologically Fragile Area) होने की बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में बिना FGD प्लांट के काम करना अनुचित है। उन्होंने ADTPS द्वारा दावा किए गए SO2 (सल्फर डाइऑक्साइड) स्तरों पर भी सवाल उठाए। हालांकि, ADTPS ने मौजूदा SO2 स्तर 15-20 μg/m3 बताया है, लेकिन लोबो का कहना है कि बिना FGD के यह स्तर सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 80 μg/m3 की सीमा को पार कर सकता है, जिससे प्रदूषण बढ़ जाएगा।
​कार्बन फुटप्रिंट और चीकू उत्पादन पर असर
​लोबो ने ADTPS के इस दावे पर भी चिंता व्यक्त की कि FGD प्लांट से कार्बन फुटप्रिंट बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि कंपनी ने इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई ठोस डेटा उपलब्ध नहीं कराया है, जबकि उसे प्रदूषण कम करने पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा, लोबो ने दहानू के प्रसिद्ध चीकू उत्पादन पर भी प्लांट के नकारात्मक प्रभाव को उजागर किया। उन्होंने बताया कि प्लांट शुरू होने के बाद चीकू का उत्पादन काफी कम हो गया था और भले ही FGD प्लांट के बाद कुछ सुधार हुआ हो, लेकिन उत्पादन अभी भी पहले जैसा नहीं है।
​लोबो ने निष्कर्ष में प्राधिकरण से ADTPS को बिना FGD प्लांट के संचालन की अनुमति न देने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और DTEPA के आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए और ADTPS से अतिरिक्त दस्तावेज़ और डेटा मंगाए जाने चाहिए। ब्रायन लोबो को उम्मीद है कि प्राधिकरण इस मामले को गंभीरता से लेगा और दहानू के पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा

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